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वेटरन नागातोमो इतिहास बनाने को तैयार जबकि जापान ने विश्व कप 2026 के लिए टीम का ऐलान किया

जापान ने 2026 फीफा विश्व कप के लिए अपनी 26 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है, और इस सूची में अनुभवी दिग्गज युटो नागातोमो का नाम सबसे आकर्षक कहानी के रूप में उभरा है। 37 वर्षीय इस बाएं बैक खिलाड़ी के लिए यह टूर्नामेंट ऐतिहासिक होने जा रहा है — वे पांच अलग-अलग विश्व कप टूर्नामों में भाग लेने वाले समुराइ ब्लू के पहले खिलाड़ी बनने जा रहे हैं। यह उपलब्धि उनके लगभग दो दशकों के अंतरराष्ट्रीय करियर का सुनहरा अध्याय होगी।

नागातोमो ने पहली बार 2010 में दक्षिण अफ्रीका विश्व कप में जापान का प्रतिनिधित्व किया था, और उसके बाद से वे लगातार इस महत्वपूर्ण टूर्नामेंट का हिस्सा रहे हैं। 2014 ब्राजील, 2018 रूस, 2022 कतर के बाद अब 2026 में वे इतिहास रचने के करीब पहुंच गए हैं। उनके करियर के आंकड़े भी प्रभावशाली हैं — वे अब तक 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं, और उनका अनुभव जापान के युवा खिलाड़ियों के लिए अमूल्य खजाना है।

भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि भारतीय खेल मीडिया में इस घोषणा को व्यापक कवरेज मिल रही है। Sports18 और NDTV Sports जैसे चैनल जापान की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि एशियाई फुटबॉल में जापान की सफलता का असर पूरे महाद्वीप पर पड़ता है। 2022 विश्व कप में जापान ने जर्मनी और स्पेन जैसी टीमों को हराकर दुनिया भर में सनसनी फैलाई थी, और भारतीय फैंस भी इस उछाल के साक्षी रहे।

हालांकि, हेड कोच हाजिमे मोरियासु के लिए इस घोषणा में कई चिंताएं भी छिपी हैं। सबसे बड़ा झटका विंगर काओरू मितोमा का चोट के कारण बाहर होना है। ब्राइटन एंड होव अल्बियन के लिए प्रीमियर लीग में शानदार प्रदर्शन करने वाले मितोमा ने 2022-23 सीजन में 21 गोल और 10 असिस्ट के आंकड़े दर्ज किए थे। उनकी गति, ड्रिबलिंग और क्रॉसिंग की क्षमता जापान के आक्रामक आक्रमण का प्रमुख हथियार थी। 2022 विश्व कप में जापान के प्रभावशाली अभियान में मितोमा ने जर्मनी के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाई थी, जब उन्होंने इल्काय गुंडोगन के सामने शानदार ड्रिबल दिखाते हुए मैच का निर्णायक क्रॉस भेजा था।

दूसरा बड़ा नुकसान कप्तान वातारू एंडो का है। लिवरपूल के इस मिडफील्डर ने प्रीमियर लीग में डिफेंस और मिडफील्ड दोनों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई है। 2023-24 सीजन में एंडो ने 33 प्रीमियर लीग मैच खेले और 4 गोल किए, जिसमें चेल्सी के खिलाफ जीत दिलाने वाला शानदार हेडर शामिल था। उनकी अनुपस्थिति जापान के मध्य क्षेत्र को कमजोर करती है, क्योंकि टीम को अनुभवी नेता के बिना टूर्नामेंट में उतरना होगा। 2022 विश्व कप में एंडो ने ग्रुप स्टेज में सभी तीन मैचों में कप्तान के रूप में खेला था।

जापान ने विश्व कप के इतिहास में अब तक सात बार क्वालीफाई किया है, जो एशिया में सबसे अधिक है। पहली बार 1998 में फ्रांस में खेलने उतरी इस टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2002, 2010 और 2022 में अंतिम 16 तक पहुंचकर किया। 2022 में कतर में जापान ने ग्रुप स्टेज से बाहर का रास्ता निकाला, जिसमें जर्मनी पर 2-1 की शानदार जीत शामिल थी — यह मैच फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े अपसेट में से एक माना जाता है।

भारतीय संदर्भ में देखें तो जापान की यात्रा भारतीय फुटबॉल के लिए प्रेरणादायक है। भारत ने अभी तक विश्व कप का सपना पूरा नहीं किया है, जबकि जापान 1990 के दशक में भारत से कहीं पीछे था। जापान ने 1993 में पहली बार विश्व कप क्वालीफाई किया और फिर निरंतर प्रगति करते हुए एशिया की सबसे मजबूत टीम बन गई। यह भारत के लिए सीख है कि लगातार निवेश, युवा विकास