ईरान ने 2026 फीफा विश्व कप के अपने अभियान में एक ऐतिहासिक क्षण रचते हुए बेल्जियम को शानदार रक्षात्मक खेल के दम पर 0-0 से ड्रॉ पर रोका। यह परिणाम मात्र एक अंक की प्राप्ति नहीं था, बल्कि एशियाई फुटबॉल के लिए एक बड़ी जीत थी। मैच का सबसे निर्णायक पल वह क्षण था जब बेल्जियम के खिलाड़ी को मैदान से बाहर का रास्ता दिखाया गया, जिससे उनकी टीम दस खिलाड़ियों पर सिमट गई। इसके बावजूद, ईरानी रक्षापंक्ति अपनी जमीन पर अडिग रही और बेल्जियम के हर हमले को नाकाम कर दिया।
बेल्जियम की टीम फीफा रैंकिंग में शीर्ष दस में स्थित है और उनके पास केविन डी ब्रुएन, रोमेलु लुकाकू जैसे विश्व-स्तरीय खिलाड़ी हैं। ईरान, जो फीफा रैंकिंग में 22वें नंबर पर है, को इस मैच में अंडरडॉग माना जा रहा था। पिछले तीन विश्व कप में ईरान लगातार प्रतिभागी रही है, जबकि भारत ने अभी तक विश्व कप के मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। यही कारण है कि भारतीय फुटबॉल प्रशंसक भी एशियाई टीमों के प्रदर्शन पर करीबी नजर रखते हैं। स्पोर्ट्स18 और एनडीटीवी स्पोर्ट्स जैसे भारतीय खेल मीडिया चैनलों पर इस मैच का विस्तृत कवरेज देखा गया, जहां क्रिकेट के बीच फुटबॉल की इस बड़ी खबर को प्रमुखता से दिखाया गया।
मैच के आंकड़े देखें तो बेल्जियम ने 65 प्रतिशत बॉल पॉजेशन के साथ 14 शॉट लगाए, जबकि ईरान ने मात्र 35 प्रतिशत पॉजेशन में 6 शॉट किए। ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवंद ने 7 शानदार सेव रखे, जिनमें से कई काफी कठिन थे। यह ईरान के रक्षात्मक संगठन और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण था। 2026 विश्व कप में 48 टीमों के विस्तारित फॉर्मेट ने एशियाई और अफ्रीकी टीमों को बेहतर प्रतिस्पर्धा का मौका दिया है, और ईरान ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया।
ईरान का विश्व कप इतिहास काफी समृद्ध है। उन्�ोंने 1978 से लेकर 2022 तक छह बार विश्व कप में भाग लिया है। 2018 रूस विश्व कप में ईरान ने पुर्तगाल को 1-1 से ड्रॉ पर रोका था और मोरक्को को 1-0 से हराया था, जो उनकी क्षमता का प्रमाण है। बेल्जियम का फुटबॉल इतिहास और भी प्रभावशाली है, जिन्होंने 2018 विश्व कप में तीसरा स्थान हासिल किया था और उनकी टीम को “गोल्डन जेनरेशन” के नाम से जाना जाता है।
भारत के संदर्भ में देखें तो ईरान की यह उपलब्धि और भी प्रेरणादायक है। भारत ने आज तक विश्व कप के क्वालीफायर में कई बार भाग लिया है, लेकिन अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाया है। 1950 में भारत ने विश्व कप में खेलने से मना कर दिया था, जो इतिहास की एक दुखद कहानी है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के उदय ने भारतीय फुटबॉल में नई जान फूंकी है। ऐसे में एशियाई टीमों की सफलता भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए प्रेरणा स्रोत बनती है।
ईरान के कोच अमीर गलेनई ने मैच के बाद कहा, “यह अंक हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमने जाने-बूझकर रक्षात्मक रणनीति अपनाई थी और खिलाड़ियों ने इसे शानदार ढंग से.execute किया।” यह बात सच में प्रभावशाली थी कि दस खिलाड़ियों वाली बेल्जियम की टीम भी ईरान की रक्षापंक्ति को भेद नहीं सकी।