बोरुसिया डॉर्टमुंड ने बुंडेसलीगा के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन इसकी विरासत सिर्फ जर्मनी तक सीमित नहीं है। Signal Iduna Park से निकलने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी दशकों से विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ते रहे हैं। जबकि क्लब ने कभी यूरोपीय क्लब स्तर पर सबसे बड़ी सफलता 1997 में चैंपियंस लीग जीतकर हासिल की, कई डॉर्टमुंड स्टार्स ने अपने राष्ट्रीय टीमों के साथ मिलकर फीफा विश्व कप की ट्रॉफी भी अपने नाम की है। Sports18 और NDTV Sports पर बुंडेसलीगा कवरेज देखने वाले भारतीय फैंस के लिए यह जानना रोचक होगा कि विश्व के सबसे बड़े टूर्नामेंट में डॉर्टमुंड का योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा है।
**2014: जर्मनी की चौथी विश्व जीत में डॉर्टमुंड का योगदान**
फीफा विश्व कप 2014 में जर्मनी की ऐतिहासिक जीत को हासिल करने वाली टीम में बोरुसिया डॉर्टमुंड के तीन प्रमुख खिलाड़ी शामिल थे। मैट्स हुम्मल्स, जो उस समय डॉर्टमुंड की रक्षा की कमान संभाल रहे थे, ब्राजील के खिलाफ फाइनल मैच में जर्मन इलेवन का हिस्सा थे। हुम्मल्स ने ब्राजील के वर्षा क्षेत्र में खेले गए उस मैच में अपनी अद्भुत डिफेंसिव क्षमता का प्रदर्शन किया, जहां जर्मनी ने आठ गोल के अंतर से जीत दर्ज की थी। इस जीत के साथ जर्मनी ने चौथी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
केविन ग्रॉसक्रेट्ज़ 2014 विश्व कप में जर्मनी के सबसे अनकही नायकों में से एक रहे। फाइनल में उन्होंने गोलकीपर मैनुअल नॉयर को गेंद पहुंचाई, जिससे टॉमस मुलर ने सातवां गोल दागा। ग्रॉसक्रेट्ज़ ने टूर्नामेंट में कुल तीन मैच खेले और उनका यह योगदान जर्मनी की विजयी यात्रा में अमूल्य सिद्ध हुआ। मार्सेल श्मेल्ज़र ने भी उस टूर्नामेंट में अपनी छाप छोड़ी, हालांकि वे प्राथमिक रक्षक के रूप में मैदान पर उतरे।
**पूर्ववर्ती विरासत: 1990 और 1954 की सफलता**
जर्मन फुटबॉल के इतिहास में बोरुसिया डॉर्टमुंड का योगदान इससे कहीं अधिक गहरा है। 1990 में इटली में हु�