फीफा विश्व कप 2026 की सुरंग में प्रवेश करते हुए, बेल्जियम की रेड डेविल्स टीम एक नए युग की शुरुआत करने के लिए तैयार है। मार्च 2024 में रूडी गार्सिया की नियुक्ति के बाद से, बेल्जियम की राष्ट्रीय टीम एक संक्रमणकालीन दौर से गुजर रही है। 2018 में विश्व कप सेमीफाइनल में पहुंचने वाली यह टीम अब पीढ़ी बदलाव की प्रक्रिया में है, जहां अनुभवी खिलाड़ियों को उभरती प्रतिभाओं के साथ मिलाकर एक संतुलित इकाई बनाने का लक्ष्य है।
भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह विशेष रूप से दिलचस्प है क्योंकि इंडियन सुपर लीग (ISL) में बेल्जियम के खिलाड़ियों की बढ़ती उपस्थिति ने दोनों देशों के बीच फुटबॉल संबंधों को मजबूत किया है। स्पोर्ट्स18 और एनडीटीवी स्पोर्ट्स पर बेल्जियम मैचों की बढ़ती कवरेज ने भारत में इस टीम के प्रशंसक आधार को काफी विस्तृत किया है, जहां अब काफी संख्या में प्रशंसक रेड डेविल्स के हर मैच को करीब से देख रहे हैं।
गार्सिया के नेतृत्व में बेल्जियम की रणनीतिक दिशा में कई बदलाव दिखाई दे रहे हैं। मार्च 2024 से अक्टूबर 2024 के बीच यूरो 2024 क्वालिफिकेशन में टीम ने 6 मैच खेले, जिसमें 4 जीत, 1 ड्रॉ और 1 हार का रिकॉर्ड रहा। इस दौरान टीम ने 9 गोल किए जबकि केवल 3 गोल खाए, जो रक्षात्मक सुदृढ़ीकरण की दिशा में स्पष्ट संकेत देता है। यूरो 2024 के लिए अंतिम 26 खिलाड़ियों की सूची में गार्सिया ने कुछ युवा चेहरों को मौका दिया, जो 2026 विश्व कप के लिए टीम के ढांचे की एक झलक प्रस्तुत करती है।
गोलकीपिंग विभाग में थिबॉट कोर्टोइस इस समय अनुपस्थित हैं, जो 2023 में एसी मिलान के खिलाफ रियल मैड्रिड के मैच में गंभीर घुटने की चोट से जूझ रहे हैं। कोर्टोइस का लंबा समय बाहर रहना गार्सिया के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसने कोज़ा अयजोला को पहली पसंद के रूप में आजमाया है। 23 वर्षीय सियान डी सारी को भी इस भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है।
रेड डेविल्स की रक्षापंक्ति में जनवर्टनजेन, कास्टैग्ने और फैबियो कैसारेस जैसे अनुभवी खिलाड़ी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। एरिक डायर, जो 2024 में बेल्जियम के लिए प्रतिबद्ध हुए, उनकी मजबूती और अनुभव डिफेंस में अतिरिक्त स्थिरता जोड़ता है। 33 वर्षीय जनवर्टनजेन ने अब तक 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और 2026 में भी टीम का महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे।
मध्य मैदान में येवे बेन्ज़ेमा के बाद बेल्�जियम के सबसे बड़े सितारे के रूप में उभरे हैं। 31 वर्षीय इस खिलाड़ी ने अपने करियर में 500 से अधिक क्लब मैचों में 100 से अधिक गोल दागे हैं और बेल्जियम के लिए 100+ अंतरराष्ट्रीय कैप हासिल किए हैं। उनकी क्रिएटिविटी और गेम-रीडिंग टीम के आक्रामक खेल की रीढ़ हैं। यूरो 2024 में उन्होंने प्रभावशाली प्रदर्शन किया और 2026 विश्व कप के लिए उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी।
आक्रामक क्षमता में लोइक ओपेंडा, जेरेमी डोकू और मार्विन डाक्स जैसे युवा खिलाड़ी अनुभवी रोमेलु लुकाकू के साथ मिलकर एक शक्तिशाली अग्रिम पंक्ति बनाते हैं। ओपेंडा ने हाल ही में कुछ शानदार प्रदर्शन किए हैं और उनकी गति तथा ड्रिबलिंग क्षमता विपक्षी रक्षापंक्तियों के लिए मुसीबत साबित हो सकती है। डोकू ने चेल्सी में अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान आकर्षित किया है।
भारत के संदर्भ में, बेल्जियम की इस टीम की कवरेज Sports18 पर बढ़ रही है, जहां प्रमुख मैचों का सीधा प्रसारण होता है। एनडीटीवी स्पोर्ट्स पर विशेषज्ञ विश्लेषण और पॉडकास्ट में बेल्जियम की संभावनाओं पर चर्चा होती रहती है। भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों में बेल्जियम के प्रशंसक