आर्सेनल के लिब्रेटेडो फॉरवर्ड लियांड्रो ट्रोसार्ड ने हालिया अंतरराष्ट्रीय ब्रेक के दौरान बेल्जियम के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए साबित किया कि उनकी क्लब फॉर्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जारी है। इसके विपरीत, स्पेन के लिए खेलने उतरे आर्सेनल के मिडफील्डर मिकेल मेरिनो को निराशाजनक अनुभव से गुजरना पड़ा, जो उच्च-दांव वाले मैचों में दबाव की असली तस्वीर पेश करता है।
यूरो 2024 के बाद से बेल्जियम का प्रदर्शन विश्व कप क्वालीफिकेशन में काफी सुधरा है। ट्रोसार्ड ने इस सीज़न में आर्सेनल के लिए प्रीमियर लीग में 7 गोल और 5 असिस्ट के आंकड़े के साथ शानदार फॉर्म में हैं, और यह लय उन्होंने राष्ट्रीय टीम में भी जारी रखी। मार्सेई के खिलाफ उनका प्रदर्शन देखते हुए बेल्जियम के कोच डोमिनिको टेडेस्को संतुष्ट नज़र आए, हालांकि मैच 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ।
ट्रोसार्ड की इस उपलब्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि पिछले दो विश्व कप क्वालीफिकेशन चक्रों में बेल्जियम को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। 2018 में रूस विश्व कप के बाद से, “रेड डेविल्स” ने हर बार शीर्ष सीड के रूप में क्वालीफाई किया, लेकिन उनकी युवा पीढ़ी के बूढ़े होने के साथ ही टीम की संरचना बदल रही है। ट्रोसार्ड जैसे खिलाड़ी इस संक्रमण काल में टीम के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इस बीच, मेरिनो का स्पेन के साथ अनुभव बिल्कुल विपरीत रहा। यूरो 2024 में स्पेन के शानदार प्रदर्शन के बाद, जहां उन्होंने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर चौथी यूरो ट्रॉफी जीती, वह दबाव अब क्वालीफिकेशन मैचों में भी जारी है। ला रोहा के लिए खेलते हुए मेरिनो को मैदान पर अधिक प्रभावशाली भूमिका की उम्मीद थी, लेकिन उनके फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन में मिश्रित परिणाम मिले। स्पेन ने वह मैच भी 1-1 की बराबरी पर छोड़ा, जिससे मेरिनो की अंतरराष्ट्रीय यात्रा में एक निराशाजनक अध्याय जुड़ गया।
भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय ब्रेक विशेष रूप से दिलचस्प रहा। Sports18 पर प्रसारित इन मैचों को देखकर, कई भारतीय दर्शकों ने सोशल मीडिया पर आर्सेनल के इन दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिप्पणियां कीं। NDTV Sports के फुटबॉल विश्लेषकों ने भी इन खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने ट्रोसार्ड की बहुमुखी प्रतिभा और मेरिनो के मिडफील्ड कंट्रोल की तुलना आर्सेनल के आगामी प्रीमियर लीग मैचों से की।
रियल मैड्रिड के खिलाड़ियों की बात करें तो मार्क कुकुरेला, थिबॉट कर्टुआ और फेडेरिको वाल्वरडे ने भी अपनी-अपही राष्ट्रीय टीमों के लिए महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उनके मैच भी ड्रॉ पर समाप्त हुए। कुकुरेला ने स्पेन के लिए शानदार डिफेंसिव प्रदर्शन किया, जबकि कर्टुआ बेल्जियम के गोलपोस्ट पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए रहे। वाल्वरडे ने उरुग्वे के लिए अपनी ऊर्जावान शैली से प्रभावित किया, लेकिन इन सभी मैचों में निर्णायक विजेता नहीं निकला।
यह प्रवृत्ति कोई नई नहीं है। विश्व कप क्वालीफिकेशन इतिहास में ड्रॉ की उच्च दर हमेशा से एक प्रमुख विशेषता रही है। 2018 रूस क्वालीफिकेशन में यूरोपीय मैचों का 38 प्रतिशत ड्रॉ पर समाप्त हुआ था, और 2022 कतर क्वालीफिकेशन में भी यह आंकड़ा 35 प्रतिशत के आसपास रहा। इस बार भी यूरोपीय जोन में अब तक खेले गए मैचों में से 36 प्रतिश