2026 फीफा विश्व कप का ग्रुप चरण अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है और इस बार का टूर्नामेंट फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। 48 टीमों के इस विस्तारित आयोजन में से अब तक कई टीमें राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह पक्की कर चुकी हैं, जबकि कई देशों के भाग्य अभी भी अंतिम मैचों पर निर्भर हैं। नॉकआउट राउंड में प्रवेश के लिए जो भी फॉर्मेट तैयार किया गया है, वह पिछले टूर्नामेंट्स से काफी अलग है और इसकी जटिलताएं टीमों के लिए रोमांचक चुनौतियां पैदा कर रही हैं।
इस विश्व कप में 48 टीमें 16 ग्रुपों में बांटी गई हैं, जहां प्रत्येक ग्रुप में तीन-तीन टीमें हैं। प्रत्येक ग्रुप में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें सीधे नॉकआउट राउंड में प्रवेश करती हैं। इसके अतिरिक्त, 16 में से चार सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान पर रही टीमें भी प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाती हैं। यह फॉर्मेट 1994 के बाद से सबसे बड़ा विस्तार है, जब टूर्नामेंट में 24 टीमें थीं और अब यह संख्या दोगुनी हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रीय टीम ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराकर एक शानदार उदाहरण पेश किया। इस जीत में सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि क्रिश्चियन पुलिसिक जैसे मुख्य खिलाड़ी के चोटिल होने के बावजूद टीम ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। ESPN के अनुसार, यह अमेरिका की निरंतर तीसरी विश्व कप उपस्थिति है जहां वे ग्रुप चरण से आगे बढ़ रहे हैं, और इस बार उनका लक्ष्य 2002 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचना है। अल जजीरा ने बताया कि अमेरिका की इस जीत ने ग्रुप में स्थिति को और दिलचस्प बना दिया है।
भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह टूर्नामेंट विशेष रूप से रोचक है, भले ही भारतीय टीम इस बार भी मौका नहीं बना सकी। Sports18 और NDTV Sports जैसे मीडिया घराने लगातार विश्व कप कवरेज कर रहे हैं और भारतीय दर्शकों में इस खेल के प्रति जुनून स्पष्ट दिख रहा है। इंडियन सुपर लीग के बढ़ते प्रचार-प्रसार के साथ ही देश में फुटबॉल की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है, जिससे प्रशंसक अब वैश्विक स्तर पर अधिक से अधिक जुड़ाव दिखा रहे हैं।
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो विश्व कप का आकार लगातार बढ़ता गया है। 1930 में केवल 13 टीमों से शुरू हुआ यह टूर्नामेंट 1982 तक 24 टीमों तक पहुंचा और 1998 में 32 टीमों के साथ स्थिर हुआ। 2026 में अब यह 48 टीमों तक पहुंच गया है, जो फीफा के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि अधिक से अधिक देशों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तार से एशिया और अफ्रीका की टीमों को अधिक प्रतिनिधित्व मिला है, और आने वाले वर्षों में 64 टीमों तक विस्तार की भी चर्चा है।
ओलंपिक्स.कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 12 टीमें आधिकारिक तौर पर राउंड ऑफ 32 में पहुंच चुकी हैं, जिनमें ब्राजील, अर्जेंटीना, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल जैसी पारंपरिक शक्तियां शामिल हैं। एशिया से जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी जगह पक्की कर ली है, जबकि अफ्रीका से मोरक्को और सेनेगल ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उत्तरी अमेरिका से अमेरिका और मैक्सिको ने ग्रुप चरण में बेहतरीन खेल दिखाया है।
एक दिलचस्प परिदृश्य यह भी उभर रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित भिड़त की अटकलें तेज हो गई हैं। यदि दोनों टीमें ग्रुप चरण से आगे बढ़ती हैं और विशेष परिस्थितियों में एक-दूसरे के सामने आती हैं, तो यह मैच भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक ध्यान आकर्षित करेगा। NBC Sports ने इस परिदृश्य को विस्तार से विश्लेषित किया है और बताया है कि किन परिस्थितियों में यह भि�