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हैती विश्व कप मंच पर स्कॉटलैंड के खिलाफ हार के साथ लौटी

कैरेबियाई फुटबॉल के इतिहास में बुधवार का दिन एक यादगार पल था, जब हैती ने 50 साल के लंबे अंतराल के बाद विश्व कप मंच पर वापसी का झंडा गाड़ा। हालांकि, एडिनबर्ग के हैम्पडन पार्क में स्कॉटलैंड के खिलाफ यह वापसी उतनी शानदार नहीं रही, जितनी करारी टीम की उम्मीदें थीं। स्कॉटलैंड ने इस कैरेबियाई द्वीप राष्ट्र को 2-0 से हराकर अपनी तैयारियों को मजबूती प्रदान की।

यह मैच हैती के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय मैत्री नहीं था — यह 2026 फीफा विश्व कप क्वालीफिकेशन चक्र की शुरुआत से पहले एक रणनीतिक तैयारी थी। कॉन्काकाफ संघ ने अपने सदस्य देशों को यूरोपीय टीमों के खिलाफ मैच खेलने का अवसर देकर उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्रदान करने की पहल की है। इसी कड़ी में हैती और स्कॉटलैंड आमने-सामने थे।

हैती की फुटबॉल यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। 1974 में जर्मनी में हुए विश्व कप में हैती ने अपनी एकमात्र विश्व कप उपस्थिति दर्ज की थी। उस टूर्नामेंट में ब्राजील, यूगोस्लाविया और ज़ेयर जैसी टीमों के साथ ग्रुप चरण में प्रतिस्पर्धा करने वाली हैती ने अपने प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। पिछले पांच दशकों में, देश ने कई राजनीतिक और प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिन्होंने फुटबॉल कार्यक्रम को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह संदर्भ विशेष रूप से प्रासंगिक है। भारत ने भी 1950 में विश्व कप में अपनी एकमात्र उपस्थिति दर्ज की थी, और उसके बाद 70 से अधिक वर्षों तक इस मंच से दूर रहा। जबकि भारत अभी एशियाई क्वालीफायर में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है, हैती जैसी कैरेबियाई टीमें दिखाती हैं कि लंबे अंतराल के बाद भी विश्व कप तक पहुंचना संभव है। स्पोर्ट्स18 और एनडीटीवी स्पोर्ट्स पर भारतीय दर्शकों द्वारा ऐसे मैचों की व्यापक कवरेज इस बात का प्रमाण है कि दुनिया भर की टीमों की यात्राओं में भारतीयों की बढ़ती रुचि।

हैती की राष्ट्रीय टीम, जिसे “लेस ब्लू” के नाम से जाना जाता है, में हाल के वर्षों में प्रतिभाओं की एक नई पीढ़ी उभरी है। कनाडा में आयोजित 2023 कॉन्काकाफ गोल्ड कप में टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, जहां उसे मेक्सिको से 2-1 से हार का सामना करना पड़ा। यह प्रदर्शन टीम की बढ़ती क्षमता का स्पष्ट संकेत था, लेकिन यूरोपीय शीर्ष टीमों के खिलाफ अनुभव की कमी स्पष्ट दिखाई दी।

स्कॉटलैंड, जो फीफा रैंकिंग में 40वें स्थान पर है, यूरोपीय क्वालीफिकेशन में नियमित प्रतिभागी रही है। उन्होंने हाल ही में यूरो 2024 के लिए क्वालीफाई किया था, जहां उन्होंने जर्मनी, स्विट्जरलैंड और हंगरी के साथ कड़ा मुकाबला किया। इस मैत्रीपूर्ण मैच में स्कॉटलैंड की टीम ने अपनी गुणवत्ता और अनुभव का लाभ उठाया।

कॉन्काकाफ की यह पहल अन्य सदस्य देशों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है। इसी सप्ताह, कुराकाओ ने जर्मनी के खिलाफ अपना विश्व कप डेब्यू किया, जो कैरेबियाई फुटबॉल के लिए एक ऐतिहासिक पल था। यह रणनीति छोटे कॉन्काकाफ देशों को बड़ी यूरोपीय टीमों के खिलाफ अनुभव प्राप्त करने का अवसर देती है, जो विश्व कप क्वालीफिकेशन में उनकी संभावनाओं को बढ़ाती है।

2026 विश्व कप, जो संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में आयोजित होगा, कॉन्काकाफ के लिए विशेष महत्व रखता है। इस टूर्नामेंट में कॉन्काकाफ को छह सीटें मिली हैं, जो पहले की तुलना में अधिक हैं। हैती, कुराकाओ, सेंट किट

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