जापान फुटबॉल संघ ने फीफा विश्व कप 2026 के लिए अपनी अंतिम 26 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है, और यह चयन वाकई में चौंकाने वाला साबित हुआ है। ब्लू समितावालों के इस ऐतिहासिक कदम ने न केवल जापानी फुटबॉल जगत में बल्कि पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों में हड़कंप मचा दिया है।
मोरिओका में हुई इस घोषणा में जापान के मुख्य कोच हाज़िमे मोरियासु ने उन खिलाड़ियों को शामिल किया है जिनके नाम की उम्मीद कम ही थी। विशेष रूप से युवा प्रतिभाओं को मौका देने और कुछ अनुभवी दिग्गजों को बाहर रखने का फैसला काफी विवादास्पद रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘#JapanSquad’ ट्रेंड करने लगा और फैंस के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं।
जापान ने विश्व कप के क्वालीफायर में शानदार प्रदर्शन किया था, जिसमें टीम ने 18 में से 8 मैच जीते और एशियाई क्वालीफायर के ग्रुप चरण को दूसरे स्थान पर पूरा किया। टीम के स्टार फॉरवर्ड टाकुमी मिनामिनो ने इस दौरान 8 गोल दागे, जबकि मिडफील्डर हातोमु कमानो ने 6 असिस्ट के साथ टीम का सबसे विश्वसनीय प्लेमेकर बनकर उभरे।
पिछले विश्व कप में जापान ने इतिहास रचा था। कतर में हुए टूर्नामेंट में जापान ने ग्रुप स्टेज में जर्मनी और स्पेन जैसी पावरहाउस टीमों को हराकर सबको चौंका दिया था। हालांकि, नॉकआउट राउंड में क्रोएशिया के हाथों 1-1 के बाद पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा। यह जापान का छठा विश्व कप था जहां वे नॉकआउट स्टेज तक पहुंचे, और इस बार वे इस उपलब्धि को और आगे ले जाना चाहेंगे।
भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए जापान की टीम हमेशा से प्रेरणा रही है। भारत में स्पोर्ट्स18 और एनडीटीवी स्पोर्ट्स जैसे चैनल जापान के मैचों का जीवंत प्रसारण करते हैं, और हाल के वर्षों में जापानी फुटबॉल के प्रति दर्शकों का लगाव बढ़ा है। इस बढ़ती रुचि का कारण न केवल जापान की तकनीकी क्षमता है, बल्कि उनकी टीम का मानसिक दृढ़ता और अनुशासन भी है।
जापान की फुटबॉल यात्रा 1998 से शुरू हुई जब वे पहली बार विश्व कप में पहुंचे। उस समय टीम को ग्रुप स्टेज से आगे निकलने में कई साल लगे, लेकिन 2002 में उन्होंने पहली बार नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया। हिडेतोशी नकाता, शिनजी कागावा और केसुके होंडा जैसे दिग्गजों ने जापानी फुटबॉल को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। आज के ज़माने में टाकुमी मिनामिनो, दायोठा उडो और रित्सु दोन जैसे खिलाड़ी यूरोपीय क्लबों में चमक रहे हैं।
इस बार की टीम में कुछ बड़े नामों की गैरमौजूदगी सबसे बड़ा आश्चर्य है। कुछ प्रमुख खिलाड़ी जो पिछले विश्व कप में थे, उन्हें इस बार जगह नहीं मिली है, जबकि कुछ युवा चेहरों को मौका दिया गया है। यह मोरियासु के विज़न को दर्शाता है कि वे भविष्य की तरफ देख रहे हैं और नई पीढ़ी को अनुभव हासिल करने का मौका देना चाहते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह साहसिक चयन जापान के लिए दोतरफा तलवार साबित हो सकता है। एक तरफ युवा ऊर्जा और नई रणनीतियां टीम को अप्रत्याशित बना सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ अनुभव की कमी बड़े मैचों में भारी पड़ सकती है। जापान का ग्रुप उनके लिए आसान नहीं होगा, और हर अंक कीमती होगी।
आगे देखते हुए, जापान का अभियान 2026 विश्व कप में शुरू होगा जहां टीम को अपनी क्षम